raj
Sunday, January 16, 2011
धीरे-धीरे..
धीरे-धीरे सुनने वालों की संख्या कम होती जा रही है. घर, समाज, आफिस कहीं भी हो अब कहनेवालों की संख्या ज्यादा हो गयी है,, शायद इसलिए संयुक्त परिवार टूटते गये, समाज बिखरने लगे, कार्यालयों में काम कम गुटबाजी अधिक बढ़ गयी..
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