Wednesday, January 12, 2011

नारी

जयशंकर प्रसाद जी ने कामायनी में लिखा है....
नारी तुम केवल श्रद्धा हो,
विश्वास-रजत-नग-पल-तल में!
पियूष स्त्रोत सी बहा करो,
जीवन के सुंदर समतल में.

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